सौर ऊर्जा में उत्तराखंड की जबरदस्त छलांग—1 गीगावाट का आंकड़ा आखिर कैसे पार हुआ?

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उत्तराखंड से आज की एक बड़ी और पॉजिटिव खबर आई है. राज्य ने सौर ऊर्जा में 1 गीगावाट का आंकड़ा पार कर लिया है. यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि पहाड़ों में बदलते भविष्य और बढ़ती ऊर्जा आत्मनिर्भरता की तस्वीर भी है.

क्या हुआ और कब हुआ?

ताज़ा सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड की कुल स्थापित सौर क्षमता अब 1027.87 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है. यह milestone फ़रवरी 2026 के मध्य में दर्ज हुआ. पूरे राज्य में ग्राउंड माउंटेड प्लांट, रूफटॉप सोलर और सरकारी भवनों पर लगाए गए सोलर सिस्टम ने मिलकर यह उपलब्धि बनाई.

सरकार क्या कह रही है?

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री Narendra Modi के हरित ऊर्जा विज़न से प्रेरित है. धामी ने साफ कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” और क्लीन एनर्जी को आगे बढ़ाते हुए राज्य ने सौर ऊर्जा को जनआंदोलन की तरह अपनाया है. इसके चलते युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए रोजगार के मौके खुले हैं.

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम रोल Uttarakhand Renewable Energy Development Agency ने निभाया है. पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में सोलर प्रोजेक्ट लगाना आसान नहीं होता, लेकिन एजेंसी ने लगातार काम करते हुए यह रास्ता आसान बनाया.

किस तरह बढ़ी सौर क्षमता?

सरकार की कई योजनाओं ने इस उपलब्धि तक पहुंचने में मदद की. अलग-अलग श्रेणियों से मिलने वाली क्षमता कुछ इस तरह है:

  • ग्राउंड माउंटेड प्लांट: 397 मेगावाट
  • रूफटॉप सोलर: 241 मेगावाट
  • मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना: 137 मेगावाट
  • कॉमर्शियल नेट मीटरिंग: 110 मेगावाट
  • कैप्टिव सोलर प्लांट: 51 मेगावाट
  • नहरों पर सोलर: 37 मेगावाट
  • सरकारी भवन: 26 मेगावाट

फिलहाल भी 100 मेगावाट के नए स्वरोजगार प्रोजेक्ट, 30 मेगावाट कैप्टिव प्लांट और 13.5 मेगावाट सरकारी इमारतों के लिए इंस्टॉल किए जा रहे हैं.

लोगों पर इसका असर क्या होगा?

स्थानीय स्तर पर दो बड़े फायदे मिलेंगे:

  1. रोजगार: गांवों में युवाओं को सोलर इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और छोटी यूनिट लगाने का काम मिल रहा है.
  2. बिजली का भरोसा: पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में जहां लाइन खींचना मुश्किल है, वहां छोटे सोलर सेटअप बिजली की स्थायी व्यवस्था बना रहे हैं.

लोगों का बिजली बिल भी आने वाले समय में कम होने की उम्मीद है, क्योंकि रूफटॉप और नेट मीटरिंग को राज्य में तेज़ी से अपनाया जा रहा है.

अगला कदम क्या हो सकता है?

सरकार का फोकस अब दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों तक सौर सिस्टम पहुंचाने और गांवों को छोटे माइक्रो-ग्रिड से जोड़ने पर है. अगर यह रफ्तार बनी रहती है, तो आने वाले दो–तीन साल में उत्तराखंड क्लीन एनर्जी के मामले में देश के टॉप राज्यों में शामिल हो सकता है.

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