आज रुद्रपुर में स्वास्थ्य विभाग की एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। सरकारी पोर्टल पर डेटा एंट्री के दौरान हुई एक गलती ने 200 सामान्य मरीजों की परेशानी बढ़ा दी। बिना किसी जांच या लक्षण के, इन मरीजों को रिकॉर्ड में टीबी संक्रमित दर्ज कर दिया गया, जिससे इलाके में डर और तनाव का माहौल बन गया।
क्या हुआ, कहां और कब?
यह मामला रुद्रपुर के सीएमओ कार्यालय से जुड़ा है। मंगलवार को जब शासन स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान टीबी मरीजों के आंकड़ों की समीक्षा हो रही थी, तब अचानक संक्रमितों की संख्या असामान्य रूप से बढ़ी हुई दिखी। जांच करने पर पता चला कि सीएमओ कार्यालय में तैनात एक क्लर्क से डेटा फीडिंग के दौरान बड़ी चूक हो गई थी।
टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत करीब साढ़े चार लाख मरीजों का डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था, इसी दौरान लगभग 200 ऐसे मरीज, जो पूरी तरह सामान्य थे, उन्हें टीबी पॉजिटिव के रूप में दर्ज कर दिया गया।
क्यों हुई यह गलती?
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह पूरी तरह मानवीय भूल थी। एक गलत क्लिक और बिना समय पर सत्यापन के डेटा आगे बढ़ता चला गया। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में गलत एंट्री होने के बावजूद किसी स्तर पर तुरंत जांच नहीं की गई।
मरीजों और परिवारों पर क्या असर पड़ा?
टीबी जैसी बीमारी का नाम जुड़ते ही कई मरीज घबरा गए। कुछ लोगों ने सामाजिक बदनामी के डर से घर से निकलना बंद कर दिया, तो कुछ ने काम पर जाना छोड़ दिया। कई परिवारों में तनाव का माहौल बन गया। मरीजों का कहना है कि अचानक सरकारी रिकॉर्ड में बीमारी दर्ज हो जाने से मानसिक दबाव बहुत बढ़ गया।
विभाग की सफाई और आगे की कार्रवाई
डीटीओ डॉ. हरेंद्र मलिक के अनुसार, सभी संबंधित मरीजों की ट्रूनेट जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि जैसे ही मामला सामने आया, सभी 200 मरीजों का रिकॉर्ड सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है और यह केवल तकनीकी गलती थी।
आगे क्या हो सकता है?
सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग अब डेटा एंट्री और सत्यापन की प्रक्रिया को और सख्त करने पर विचार कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो। साथ ही जिम्मेदारी तय करने की भी संभावना जताई जा रही है।
इस update पर नजर बनी हुई है।
