उत्तराखंड में आज भी बड़ी संख्या में किसान जैविक खेती की ओर लौटना चाहते हैं। इन्हीं जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना (Paramparagat Krishi Vikas Yojana Uttarakhand) के तहत किसानों को जैविक खेती के लिए सीधी वित्तीय मदद देना शुरू किया है। यह योजना खासतौर पर छोटे और मध्यम किसानों के लिए बड़ी राहत बन रही है।
इस लेख में आपको सहायता राशि, पात्रता, दस्तावेज़, आवेदन प्रक्रिया और राज्य में इसके असर की पूरी जानकारी आसान भाषा में मिलेगी।
परंपरागत कृषि विकास योजना क्या है?
यह योजना कृषि विभाग, उत्तराखंड द्वारा चलाई जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देना है।
सरकार किसानों को जैविक खेती में इस्तेमाल होने वाली सभी जरूरी चीजें खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देती है — ताकि किसान रासायनिक खादों से हटकर प्राकृतिक खेती अपना सकें।
किसको फायदा मिलेगा? (Eligibility)
इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो:
- उत्तराखंड के स्थायी निवासी हों
- राज्य में अपनी कृषि भूमि रखते हों
- जिनका नाम खतौनी या राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो
- जैविक खेती करने के इच्छुक हों
- आवश्यक जैविक इनपुट Krishi Nivesh Kendras से खरीदते हों
कोई आय सीमा लागू नहीं है — हर किसान आवेदन कर सकता है।
कितना लाभ मिलेगा?
राज्य सरकार किसानों को जैविक खेती करने के लिए:
₹9,000 प्रति हेक्टेयर (Maximum incentive per hectare)
यह राशि निम्न चीजें खरीदने के लिए दी जाती है:
- जैविक बीज
- कंपोस्ट, वर्मी-कंपोस्ट
- हरी खाद
- बायोफर्टिलाइज़र
- बायोपेस्टिसाइड
- नीम ऑयल
- PROM
- बर्मी कम्पोस्ट
- वेस्ट डी-कंपोज़र
- अन्य जैविक इनपुट
आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)
A. Offline प्रक्रिया (Gram Sabha Selection)
- किसान Gram Sabha की बैठक में प्रस्ताव देता है।
- खुली बैठक में किसानों का चयन किया जाता है।
- चयन की जानकारी जनप्रतिनिधि कृषि विभाग को भेजता है।
- किसान Krishi Nivesh Kendra से जैविक इनपुट खरीदता है।
- बिल और दस्तावेज जांचने के बाद सहायता राशि सीधे बैंक खाते में भेज दी जाती है।
B. Online आवेदन (Direct Application)
किसान यहां से आवेदन कर सकता है:
https://pgsindia-ncof.gov.in
ऑनलाइन फॉर्म में सभी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं।
दस्तावेज़ सत्यापन और इनपुट खरीदने के बाद सब्सिडी सीधे खाते में आ जाती है।
जरूरी दस्तावेज
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड
- पहचान पत्र
- मोबाइल नंबर
- राशन कार्ड
- जन्म प्रमाण पत्र
- खेती की जमीन का खसरा/खतौनी
- पासपोर्ट साइज फोटो
- जैविक इनपुट खरीद के बिल
- बैंक पासबुक की कॉपी
स्टेटस चेक कैसे करें?
- जिन किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, वे पोर्टल पर लॉगिन करके आवेदन की स्थिति देख सकते हैं:
https://pgsindia-ncof.gov.in - ऑफलाइन चयन होने पर संबंधित तहसील/कृषि विभाग किसान को अपडेट देता है।
Important Dates
- योजना पूरे साल चलती है, लेकिन Gram Sabha द्वारा चयन खरीफ–रबी सीजन के हिसाब से किया जाता है।
- ऑनलाइन आवेदन सालभर उपलब्ध रहता है।
Uttarakhand के किसानों के लिए क्या खास है?
- पर्वतीय जिलों में जैविक खेती की परंपरा हमेशा से मजबूत रही है।
- इस योजना से छोटे किसान भी chemical-free खेती की ओर लौट पा रहे हैं।
- जैविक उत्पादों को हाई वैल्यू मार्केट में बेचने में आसानी होती है।
- राज्य सरकार ODOP और Organic Clusters को भी इसी योजना से जोड़ रही है।
FAQ
परंपरागत कृषि विकास योजना में कितनी सब्सिडी मिलती है?
किसानों को ₹9,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलती है।
क्या छोटे किसान भी आवेदन कर सकते हैं?
हाँ, किसी भी आकार की भूमि रखने वाला किसान आवेदन कर सकता है।
क्या योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन जरूरी है?
ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीके उपलब्ध हैं।
जैविक इनपुट कहां से खरीदने होंगे?
केवल मान्यता प्राप्त Krishi Nivesh Kendras से।
सब्सिडी कब मिलती है?
दस्तावेज सत्यापन और खरीद के बिल जमा करने के बाद राशि बैंक खाते में जाती है।
