किच्छा क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए आज एक अहम मुद्दा सामने आया है। किच्छा शुगर कंपनी की वार्षिक बैठक में किसानों की बढ़ती लागत और कम गन्ना मूल्य को लेकर खुलकर बात रखी गई। किसानों का कहना है कि मौजूदा दामों में खेती करना अब मुश्किल होता जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को किच्छा शुगर कंपनी की 53वीं वार्षिक साधारण बैठक मिल के गेस्ट हाउस में हुई। इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2024–25 का वार्षिक लेखा-जोखा सदन के सामने रखा गया। इसी दौरान कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. गणेश उपाध्याय ने गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग जोरदार तरीके से उठाई।
क्या हुआ, कहां और कब?
यह मामला किच्छा शुगर मिल, रुद्रपुर क्षेत्र से जुड़ा है। बैठक में डॉ. उपाध्याय ने कहा कि खेत की जुताई से लेकर गन्ना मिल तक पहुंचाने तक, हर स्तर पर खर्च तेजी से बढ़ा है। डीजल, खाद, मजदूरी और परिवहन की लागत किसानों पर भारी पड़ रही है।
मांग क्यों उठी?
बताया गया कि एक एकड़ में करीब 300 क्विंटल गन्ने की फसल तैयार करने में लगभग 1 लाख 16 हजार रुपये का खर्च आता है। जबकि मौजूदा गन्ना मूल्य के हिसाब से किसानों को करीब 1 लाख 20 हजार रुपये ही मिल पाते हैं। यानी मेहनत और जोखिम के मुकाबले किसानों के हाथ बहुत कम बचता है। इसी वजह से 500 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य तय करने की मांग की गई।
किसानों पर असर
कम मुनाफे की वजह से कई किसान अब गन्ना खेती से दूरी बनाने लगे हैं। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में मिल को गन्ने की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि सही दाम नहीं मिले तो खेती जारी रखना संभव नहीं होगा।
आगे क्या हो सकता है?
मिल के अधिशासी निदेशक एपी बाजपेयी ने किसानों के सुझावों पर कार्य योजना बनाने का आश्वासन दिया है। बैठक की अध्यक्षता सत्येंद्र सिंह ने की। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और समाधान पर विचार होगा।
अब देखना होगा कि किसानों की यह मांग सिर्फ बैठक तक सीमित रहती है या आने वाले समय में गन्ना मूल्य को लेकर कोई ठोस फैसला लिया जाता है।
इस update पर नजर बनी हुई है।
