किच्छा में किसानों से जुड़ी एक अहम पहल पर काम आगे बढ़ा है। भारत सरकार की फार्मर रजिस्ट्री योजना के तहत किसानों के खातों का डेटा अपडेट कर यूनिक आईडी बनाने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। इसी को लेकर तहसील परिसर में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, यह प्रशिक्षण शनिवार को किच्छा तहसील परिसर में हुआ। कार्यक्रम का मकसद किसानों के अलग-अलग विभागों में बिखरे डेटा को एक जगह जोड़ना है, ताकि हर किसान की एक एकीकृत पहचान बन सके।
क्या हुआ, कहां और कब?
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर डॉ. पीयूष मिश्रा और नोडल अधिकारी सत्यपाल गंगवार मौजूद रहे। उन्होंने एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर और गन्ना विभाग के कर्मचारियों को ऑपरेटर की भूमिका के लिए प्रशिक्षित किया। वहीं, राजस्व विभाग के कर्मचारियों को वेरिफायर (सत्यापनकर्ता) के तौर पर ट्रेनिंग दी गई, ताकि किसानों के रिकॉर्ड सही तरीके से जांचे जा सकें।
योजना की जरूरत क्यों पड़ी?
अभी किसानों का डेटा अलग-अलग विभागों में अलग-अलग रूप में मौजूद है। इससे कई बार योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता या गलतियां हो जाती हैं। फार्मर रजिस्ट्री योजना के जरिए किसानों का पूरा डेटा एक खाते से जोड़ा जाएगा, जिससे पहचान, जमीन, फसल और योजना से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी।
स्थानीय किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
इस पहल से किच्छा और आसपास के किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। सब्सिडी, फसल बीमा, मुआवजा या अन्य सहायता के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने की परेशानी कम हो सकती है। साथ ही, गलत या डुप्लीकेट रिकॉर्ड की समस्या भी घटेगी।
आगे क्या हो सकता है?
प्रशिक्षण के बाद जल्द ही फील्ड लेवल पर डेटा अपडेट का काम शुरू होने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि सही सत्यापन के बाद किसानों को उनकी यूनिक फार्मर आईडी से जोड़ा जाएगा। इससे भविष्य में योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा।
किसानों से भी अपील की जा सकती है कि वे अपने दस्तावेज सही रखें और डेटा अपडेट के समय सहयोग करें, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।
इस update पर नजर बनी हुई है।
