देहरादून में एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने उत्तराखंड की राजनीति में एक अलग ही गर्माहट भर दी। आमतौर पर एक-दूसरे पर सवाल उठाने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच हुई मुलाकात ने राजनीति से ज़्यादा मानवीय रिश्तों की मिसाल पेश की। सीएम धामी अपने खेत में उगे चावल का पूरा कट्टा लेकर सीधे हरीश रावत के घर पहुंचे—और यह दृश्य अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या हुआ, कब और कहाँ?
शुक्रवार, 31 जनवरी को मुख्यमंत्री धामी अचानक देहरादून की डिफेंस कॉलोनी पहुंचे, जहाँ हरीश रावत का आवास स्थित है। उनके हाथ में था—अपने ही खेत में उगा चावल। मुलाकात का पूरा पल काफी आत्मीय रहा, जिसकी तस्वीरें खुद सीएम धामी ने सोशल मीडिया पर साझा कीं। इसके बाद यह खबर तेजी से वायरल हो गई।
मुलाकात के पीछे की वजह? एक पुराना वादा
कुछ महीने पहले की बात है—खटीमा दौरे पर सीएम धामी हल चलाते और खेती-किसानी करते नज़र आए थे। तब हरीश रावत ने उन तस्वीरों पर टिप्पणी की थी, और जवाब में धामी ने खुलकर कहा था—
“जब फसल तैयार होगी, मैं आपको चावल खिलाऊंगा।”
अब फसल तैयार हो गई, और सीएम धामी ने वह वादा निभाने के लिए खुद चावल लेकर पहुँच गए। यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, बल्कि उत्तराखंड की कृषि संस्कृति का भी प्रतीक बनी।
दोनों नेताओं ने क्या कहा?
सीएम धामी ने कहा कि यह भेंट राज्य के किसानों की मेहनत और ग्रामीण परंपरा को सम्मान देने जैसी है।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस कदम को “राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर रिश्तों को निभाने की परंपरा” कहा और मुख्यमंत्री का आभार जताया।
लोगों पर इसका क्या असर?
देहरादून के स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात ने उत्तराखंड की राजनीति में एक सकारात्मक संदेश दिया है।
ऐसे समय में जब देशभर की राजनीति में तीखी बयानबाज़ी आम हो चुकी है, यह दृश्य बता रहा है कि—
व्यक्तिगत संबंध राजनीति से बड़े होते हैं।
यह कदम खासकर युवाओं में यह संदेश देता है कि सार्वजनिक जीवन में किए गए वादे निभाना नेतृत्व की असली पहचान है।
अगला कदम क्या हो सकता है?
राजनीतिक रूप से इस मुलाकात के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं—
लेकिन फिलहाल इसे एक शिष्टाचार और सद्भाव की पहल के रूप में ही देखा जा रहा है।
यह भी संभव है कि आगे चलकर दोनों नेताओं के बीच संवाद के नए रास्ते खुलें।
इस अपडेट पर नज़र बनी हुई है।
