देहरादून–हरिद्वार–ऋषिकेश में मेट्रो की जगह नया ट्रांजिट मॉडल: क्या सच में हवा में दौड़ेंगी कारें?

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देहरादून। आज राज्य सरकार की ट्रांसपोर्ट प्लानिंग को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोगों के लिए अब मेट्रो की जगह पीआरटी, ई-बीआरटीएस और रोपवे जैसे नए मॉडल पर काम तेज हो गया है।

दरअसल, आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इन मेगा परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में शहरों का सफर पूरी तरह बदल सकता है।

देहरादून में 31.52 किमी का ई-बीआरटीएस कॉरिडोर

राजधानी में आईएसबीटी से रायपुर तक 31.52 किलोमीटर लंबा ई-बीआरटीएस कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसमें 35 स्टेशन होंगे। बढ़ती आबादी और रोज बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इसे प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया है।

पीआरटी के तीन कॉरिडोर

देहरादून में क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर, पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन और गांधी पार्क से आईएसबीटी तक पीआरटी कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। यह सिस्टम छोटे ऑटोमेटेड कैप्सूल या पॉड की तरह होगा, जो ऊंचाई पर ट्रैक पर चलेगा।

ऋषिकेश–हरिद्वार में रोपवे और मल्टीमॉडल हब

त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक रोपवे को जरूरी मंजूरी मिल चुकी है। हरिद्वार में डीडीयू पार्किंग से चंडी देवी और मनसा देवी तक इंटीग्रेटेड रोपवे की योजना है। तीर्थ सीजन में यह ट्रैफिक कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो जाम से राहत, सफर का समय कम और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है। खासकर तीर्थ और पर्यटन सीजन में इसका बड़ा फायदा दिख सकता है।

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है: क्या ये योजनाएं तय समय में जमीन पर उतर पाएंगी?

फिलहाल सरकार ने निजी निवेश आकर्षित करने और 30 साल के कंसेशन पीरियड जैसे विकल्पों पर भी विचार शुरू कर दिया है।

इस update पर नजर बनी हुई है।

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